RAMAYANA AGAINST SHOODRAS ,WOMEN AND DIFFERENTLY ABLED (Hindi)


 

रामचरित मानस के दोहे और उनके भावार्थ :'
फुर्सत में गोस्वामी तुलसीदास रचित "रामचरित मानस" और "भगवद गीता" जैसी पवित्र रचनाओं का अध्ययन कर रहा हूँ। यह पवित्र किताबें मेरे बुकशेल्फ की शोभा भी बढ़ाती हैं।
प्रस्तुत है "रामचरित मानस" की कुछ चौपाईयाँ और उनके भावार्थ
1- जे बरनाधम तेलि कुम्हारा। स्वपच किरात कोल कलवारा। पेज 1029, दोहा 129 छंद (1), उत्तर कांड
भावार्थ
तेली, कुम्हार, चाण्डाल, भील, कोल और कलवार आदि जो वर्ण में नीचे हैं॥3॥ 
എണ്ണ ഉണ്ടാക്കുന്നവർ മൺപാത്രങ്ങൾ ഉണ്ടാക്കുന്നവർ
മറ്റു കോലി ഭീൽ സമുദായങ്ങളൊക്കെ നീച വർണ്ണം 
2- *नारी मुई गृह संपत्ति नासी, मूड़ मुड़ाई होहिं संयासा*
                (उ•का• 99ख  03)
(घर की नारी 'पत्नी' मरे तो समझो एक सम्पत्ति का नाश हो गया, फिर दुबारा दूसरी पत्नी ले आना चाहिए, पर अगर पति की मृत्यु हो जाए तो पत्नी को सिर मुंड़वाकर घर में एक कोठरी में रहना चाहिए, रंगीन कपड़े व सिंगार से दूर तथा दूसरी शादी करने की शख्त मनाही होनी चाहिए)
ഭാര്യ മരിച്ചാൽ ഒരു സമ്പത്തു നഷ്ട്ടമായതുപോലെ
വീണ്ടും വേളി കഴിക്കാം
ഭർത്താവ് മരിച്ചാൽ തല മുണ്ഡനം ചെയ്തു മൂലയിൽ
ഒതുങ്ങി കഴിയണം  
3- ते बिप्रन्ह सन आपको पुजावही,उभय लोक निज हाथ नसावही*
भावार्थ :- जो लोग ब्रह्मण से सेवा/ काम लेते हैं, वे अपने ही हाथों स्वर्ग लोक का नाश करते हैं)
ബ്രാഹ്മണരെ സേവകരാക്കുന്നവർ നരകത്തിൽ പോകുന്നു 
4- अधम जाति मै विद्दा पाए। भयऊँ जथा अहि दूध पिआएँ*
उत्तर कांड 105 क 03 , पेज 986,दोहा 99
भावार्थ :- नीच जाति (SC,ST,OBCs) विद्या/ज्ञान प्राप्त करके वैसे ही जहरीले हो जाते हैं जैसे दूध पिलाने के बाद साँप 
പാല് കുടിച്ചിട്ടും പാമ്പ് വിഷധാരി ആകുന്നതുപോലെ വിദ്യാഭ്യാസം
ചെയ്യുന്ന ശൂദ്രൻ ഭവിക്കുന്നു 
5- आभीर , जमन , किरात खस,स्वपचादि अति अधरूप जे (उत्तर कांड 129 छं•01 )
अर्थात अहीर (यादव), यवन (बाहर से आये हुए लोग जैसे इसाई और मुसलमान आदि) आदिवासी, दुष्ट, सफाई कर्मचारी आदि अत्यंत पापी हैं, नीच हैं।
യാദവർ യവനർ ആദിവാസികൾ തുടങ്ങിയവർ
അധമന്മാർ  
6- काने खोरे कूबरे कुटिल कुचली जानि
तिय बिसेषि पुनिचेरि कहि भरतमातु मुसुकानि॥
(अ• का• दोहा 14)
कानों, लंगड़ों और कुबड़ों को कुटिल और कुचाली जानना चाहिए। उनमें भी स्त्री और खासकर दासी! इतना कहकर भरतजी की माता कैकेयी मुस्कुरा दीं॥
മൂകരും ബധിരരും അംഗ പരിമിതരും കുടിലർ .
പ്രതേകിച്ചും സ്ത്രീകൾ, അവരിൽ ദാസിമാർ 
7- सति हृदय अनुमान किय सबु जानेउ सर्वग्य,कीन्ह कपटु मै संभु सन नारी सहज अग्य। (बा • का• दोहा 57क)
भावार्थ- सती ने हृदय में अनुमान किया कि सर्वज्ञ शिव सब जान गए। मैंने शिव से कपट किया। स्त्री स्वभाव से ही मूर्ख और बेसमझ होती है॥ 57(क)॥ 
സ്ത്രീകൾ മൂർഖ സ്വാഭാവികൾ 
8- ढोल गवार शूद्र पशू नारी,सकल ताड़न के अधिकारी ( सु•का• दोहा 58/ 03)
भावार्थ - ढोल, गंवार और पशुओं की हीे तरह शूद्र (SC,ST,OBCs) एव साथ-साथ नारी को भी पीटना चाहिए।
ഡോലക് ശൂദ്ര ഗവാർ പശു നാരി എല്ലാത്തിനെയും തല്ലണം 
9- पुजिए बिप्र शील गुण हीना,शूद्र न पुजिए गुण ज्ञान प्रवीणा" (पेज 986, दोहा 99 (3), उ. का)
भावार्थ :- ब्रह्मण चाहे शील-गुण वाला नहीं *है फिर भी पूजनीय हैं और शूद्र (SC,ST,OBCs)चाहे कितना भी शीलवान,गुणवान या ज्ञानवान हो मान-सम्मान नहीं देना चाहिए)
ശീല ഗുണങ്ങളില്ലാത്ത ബ്രാഹ്മണരും ബഹുമാനിക്കപ്പെടണം
അതെല്ലാം ഉണ്ടായാലും ശൂദ്രർ എത്ര ഗുണവാന്മാരും
പണ്ഡിതരും ആയാലും  അവരെ ആദരിക്കരുത് 
10-लोक वेद सबही विधि नीचा, जासु छांट छुई लेईह सींचा। (पेज 498 दोहा 195 (1), अ. का.)
   केवट(निषाद, मल्लाह) समाज ,  वेदशास्त्र दोनों से नीच है, अगर उसकी छाया भी छू जाए तो नहाना चाहिए।
നിഷാദ് മല്ല ജാതികൾ വേദങ്ങളിലും ശാസ്ത്രങ്ങളിലും
നീച ജാതികൾ.ഇവരുടെ നിഴൽ തട്ടിയാലും കുളിക്കണം 
 
स्पष्टीकरण :- महान काव्य "रामचरित मानस" के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए मजनहित में जारी
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